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एचआरएमएस से भुगतान तक होगी जांच
वित्त विभाग के पत्र के अनुसार, राज्यकर्मियों के वेतन विपत्र एचआरएमएस पोर्टल के माध्यम से तैयार किए जाते हैं। इसके बाद मेकर, चेकर और अप्रूवर स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने पर सीएफएमएस के जरिए भुगतान किया जाता है। शिक्षा विभाग से जुड़े वेतन भुगतान के आंकड़ों की प्रारंभिक जांच में कई विसंगतियां सामने आने के बाद पूरी व्यवस्था की समीक्षा जरूरी मानी गई है। निर्देश के तहत शिक्षा विभाग के मुख्यालय से लेकर विभिन्न कार्यालयों तक वेतन और भत्तों से संबंधित अभिलेखों तथा भुगतान के आंकड़ों की जांच कराई जाएगी। यह प्रक्रिया वरिष्ठ पदाधिकारियों की निगरानी में पूरी की जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर हुई गड़बड़ी की पहचान की जा सके।
गड़बड़ी पर कार्रवाई, अतिरिक्त भुगतान की होगी वसूली
वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान जिन मामलों में अनियमितता सामने आएगी, उनमें संबंधित मेकर, चेकर और अप्रूवर की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। जिम्मेदार पाए जाने वाले कर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार आपराधिक एवं अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही गलत तरीके से अधिक भुगतान की गई सरकारी राशि की वसूली भी की जाएगी।
नियमित अधिकारियों को मिलेगी सत्यापन की जिम्मेदारी
वेतन भुगतान प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए वित्त विभाग ने मेकर, चेकर और अप्रूवर की जिम्मेदारी प्राथमिकता के आधार पर नियमित पदाधिकारियों को सौंपने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य वेतन तैयार करने, जांचने और अंतिम मंजूरी देने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। भागलपुर में सामने आए कथित फर्जी वेतन भुगतान मामले के बाद राज्यव्यापी जांच को शिक्षा विभाग की भुगतान व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब जांच के दौरान यह पता लगाना अहम होगा कि वेतन संबंधी विसंगतियां किन स्तरों पर हुईं और सरकारी राशि के भुगतान में निर्धारित प्रक्रियाओं का कितना पालन किया गया।



