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उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पंचायत स्तर पर विकास कार्य लगभग ठप हो चुके हैं। ठेकेदारों को भुगतान नहीं मिलने के कारण योजनाएं अधूरी पड़ी हैं और इसका सीधा असर ग्रामीण विकास पर पड़ रहा है। राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर किशोर ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि अगले 3-4 महीनों में बिहार में गंभीर वित्तीय संकट उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार शराबबंदी कानून में ढील देने या उसे हटाने पर विचार कर सकती है, क्योंकि सरकार के पास राजस्व बढ़ाने का कोई दूसरा ठोस विकल्प नहीं है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए प्रशांत किशोर ने उनके नेतृत्व को भी कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार की मानसिक और शारीरिक स्थिति ठीक नहीं है और भारतीय जनता पार्टी उनके चेहरे का इस्तेमाल “मुखौटे” के रूप में कर रही है, ताकि जनता को भ्रमित किया जा सके। किशोर के इन बयानों के बाद बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और गरमा सकता है, खासकर तब जब राज्य में चुनावी गतिविधियां तेज होंगी।
हालांकि, सरकार की ओर से इन आरोपों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



