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पुलिस को देखते ही दुकान से फरार हुआ संदिग्ध
यूपी के औषधि निरीक्षक के अनुसार, अभिषेक सिंह का नाम पहले भी नकली दवाओं के कारोबार में सामने आ चुका है। करीब तीन वर्ष पूर्व भी उसे इस तरह के मामले में पकड़ा गया था। जांच टीम को आशंका है कि मोहनिया स्थित दुकान के माध्यम से वह कैमूर जिले के विभिन्न इलाकों में दवाओं की आपूर्ति करता था। छापेमारी के दौरान दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज भी देखी गई। इसमें कथित तौर पर यूपी पुलिस की गाड़ी सामने से आती देखकर दुकान संचालक द्वारा अभिषेक सिंह को वहां से भगाने की गतिविधि सामने आई है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच की जा रही है।
सात से आठ प्रकार की दवाओं के बिलों की जांच
कार्रवाई के दौरान मौके से ‘सेफू 500’ नामक दवा बरामद की गई। अधिकारियों के अनुसार, यह दवा कथित तौर पर अभिषेक सिंह से बिना वैध दस्तावेज के खरीदी गई थी। इसके अतिरिक्त दुकान में मौजूद सात से आठ अन्य प्रकार की दवाओं के खरीद-बिक्री संबंधी बिलों का भी सत्यापन किया जा रहा है। ड्रग इंस्पेक्टर किरण कुमारी और अभिषेक चौहान ने बताया कि जिन दवाओं के पक्के बिल और वैध कागजात उपलब्ध नहीं हैं, उनके नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। दुकान संचालक को जब्त दवाओं से संबंधित वैध दस्तावेज और खरीद के बिल प्रस्तुत करने के लिए दो से तीन दिनों का समय दिया गया है।
दस्तावेज नहीं मिलने पर रद्द हो सकता है दुकान का लाइसेंस
औषधि विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर दवाओं से संबंधित वैध कागजात प्रस्तुत नहीं किए जाने पर दुकान का लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। वहीं, मामले में दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा। फिलहाल यूपी पुलिस और औषधि विभाग की टीम फरार संदिग्ध दवा आपूर्तिकर्ता अभिषेक सिंह की तलाश में जुटी है।



