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गांव में मासूम की अमानुषीयता: चचेरे मामा ने की हैवानियत, खेत में छोड़ फरार होने की कोशिश नाकाम

मुंगेर: 4 साल की मासूम से चचेरे मामा का दुष्कर्म, मकई खेत में छोड़ फरार

मुंगेर, तारापुर (हरपुर): बिहार के मुंगेर जिले के तारापुर अनुमंडल के हरपुर थाना क्षेत्र में एक ऐसी वारदात हुई, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया। रविवार की संध्या में चार साल की नन्ही बच्ची के साथ उसके चचेरे मामा ने मकई के खेत में क्रूर दुष्कर्म किया।

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हरपुर थाना

आरोपी ने घटना को अंजाम देकर बच्ची को वहीं बेहोशी की हालत में छोड़ भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की तत्परता ने उसे जकड़ लिया। इस जघन्य अपराध ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी और ग्रामीणों में आक्रोश की लहर दौड़ गई।परिवार के मुताबिक, बच्ची शाम को अचानक लापता हो गई। घंटों की बेचैनी भरी तलाश के बाद स्वजन और पड़ोसियों ने उसे गांव के पास मकई की फसल के बीच खून से सनी हालत में पाया।

बेहोशी की वजह से वह कुछ बोल भी न सकी। तुरंत उसे तारापुर के अनुमंडलीय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर चोटों को देखते हुए भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया। वहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन मानसिक आघात का असर लंबे समय तक रह सकता है।घटना की खबर फैलते ही पुलिस महकमा हरकत में आ गया। एएसपी संकेत कुमार के नेतृत्व में तारापुर थानाध्यक्ष राजकुमार, हरपुर थानाध्यक्ष सत्यम कुमार और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। एफएसएल विशेषज्ञों ने खेत से साक्ष्य संग्रह किए, जिनमें खून के धब्बे, कपड़े के टुकड़े और अन्य क्लू शामिल हैं।

पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी जमुई जिले का रहने वाला है। वह मेला घूमने अपने दोस्त संग आया था और चचेरी बहन के घर ठहरा, बहन ने उसे खाने को दिया, उसी समय बहनोई मवेशियों का दूध निकालने गोशाला गया। इसी फासले का फायदा उठाकर उसने मासूम को लालच देकर खेत ले गया और नृशंसता की हद पार कर दी। पुलिस ने आरोपी को रातोंरात गिरफ्तार कर लिया।

थानाध्यक्ष सत्यम कुमार ने बताया कि केस की गंभीरता को देखते हुए स्पीडी ट्रायल सुनिश्चित किया जाएगा। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण पूरा हो चुका है और चार्जशीट जल्द दाखिल होगी। एसएसपी ने सख्ती से जांच के निर्देश दिए हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि ऐसे अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। परिवार वाले सदमे में हैं और बच्ची के न्याय की आस लगाए हैं। यह मामला बाल सुरक्षा कानूनों की पोल खोलता है, जहां रिश्तेदार ही खतरा बन जाते हैं। प्रशासन ने गांव में जागरूकता अभियान चलाने का ऐलान किया है।

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