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इन स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति भी नामांकन के मुकाबले बेहद कम मिली, जिससे शिक्षण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए।
जांच में यह भी सामने आया कि शिक्षकों को नियमित पाठ टीका (लेसन प्लान) तैयार कर प्रधानाध्यापक से अनुमोदित कराने का निर्देश था, लेकिन कोई भी शिक्षक इसे प्रस्तुत नहीं कर सका। इससे विद्यालय संचालन में लापरवाही और प्रशासनिक नियंत्रण की कमी साफ झलकती है। प्राथमिक विद्यालय झरिया की स्थिति और भी खराब मिली। यहां न तो क्लास रूटीन उपलब्ध था और न ही जरूरी पंजी जैसे मिड-डे मील, छात्र उपस्थिति और शिक्षक उपस्थिति रजिस्टर प्रस्तुत किए गए। हैरानी की बात यह रही कि प्रधानाध्यापक बिना स्वीकृति के अनुपस्थित पाए गए। वहीं प्राथमिक विद्यालय धूमरदेव में छात्रों की उपस्थिति मात्र 4-5 रही, जबकि एमडीएम पंजी में करीब 50 छात्रों को लाभान्वित दिखाया गया था। इससे रिकॉर्ड में गड़बड़ी की आशंका जताई गई। विद्यालय के पंजी भी अद्यतन नहीं मिले।
मध्य एवं उच्च विद्यालय डुमरकोन में चेतना सत्र निर्धारित समय से करीब एक घंटे देरी से संचालित किया जा रहा था। साथ ही जर्जर ब्लैकबोर्ड पर ही पढ़ाई कराई जा रही थी, जबकि मरम्मत के स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके थे। निरीक्षण के दौरान कई शिक्षक बिना सूचना के अनुपस्थित पाए गए, जिनमें बघैला की शिक्षिका नगमा, डुमरकोन उच्च विद्यालय की रिंपा कुमारी और उत्क्रमित मध्य विद्यालय डुमरकोन की लीलावती देवी शामिल हैं। इनके अनुपस्थित दिनों का वेतन काटते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया है। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अंशु कुमार ने सभी दोषियों के खिलाफ स्पष्टीकरण जारी करते हुए चेतावनी दी है कि दो दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आगे भी इस तरह के औचक निरीक्षण जारी रहेंगे।



