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अब राजद भी मुसलमानों को अपना राजनीतिक बंधुआ मजदूर नहीं समझेगी और न ही बीजेपी और जदयू जो यह सोचती है कि हिंदू समाज के कुछ लोग लालू जी के डर से उन्हें ही वोट देंगे, वे भी जन सुराज के आने से डरेंगे। उन्होंने कहा कि अगर जन सुराज के प्रयास से बिहार में फिर से लोकतंत्र जिंदा हो रहा है तो यह बिहार की जनता के लिए अच्छी खबर है।इसके साथ ही प्रशांत किशोर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आगामी बिहार दौरे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अब बिहार में चुनाव हैं।
इसलिए नवंबर तक अमित शाह को सिर्फ बिहार ही दिखेगा। अब नवंबर तक हर केंद्रीय योजना का शिलान्यास बिहार से होगा, किसान सम्मान निधि का पैसा भी बिहार से भेजा जाएगा। किन्तु अगर गृह मंत्री को वाकई बिहार और बिहार के बच्चों की इतनी चिंता है तो बिहार के जो बच्चे गुजरात की फैक्ट्रियों में मात्र 12 हजार रुपये में काम कर रहे हैं, उन्हें गुजरात के मजदूरों के बराबर फैक्ट्रियों में मजदूरी दिलवाएं। NDA सरकार के 11 साल में भाजपा बिहार में फैक्ट्री नहीं लगा पाई। इसलिए गृह मंत्री अमित शाह जी से हमारी मांग है कि वे सूरत, मोरबी की फैक्ट्रियों में काम कर रहे बिहार के बच्चों को भी गुजरात के मजदूरों के बराबर मजदूरी दिलवाएं।