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शिकायत के अनुसार:
कुल 12.50 लाख रुपये की मांग की गई
10.70 लाख रुपये नकद तीन किस्तों में दिए गए
करीब 3.48 लाख रुपये डिजिटल ट्रांजैक्शन के जरिए भेजे गए
बाद में सिर्फ 1.53 लाख रुपये वापस किए गए। शेष रकम मांगने पर धमकी और ब्लैकलिस्ट करने की बात कही गई। परिवादकर्ता का आरोप है कि रकम लेने के बाद भी काम नहीं कराया गया और लगातार बहाने बनाए जाते रहे। इससे विवाद बढ़ा और मामला शिकायत तक पहुंच गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने एक संयुक्त जांच टीम बनाई है, जिसमें शामिल हैं:
उप विकास आयुक्त
वरीय कोषागार पदाधिकारी
भूमि सुधार उप समाहर्ता
पुलिस उपाधीक्षक
कार्यपालक अभियंता
जिला स्तरीय निगरानी सह-धावा दल
टीम को निर्देश दिया गया है कि जल्द से जल्द विस्तृत जांच कर रिपोर्ट सौंपी जाए। जिला शिक्षा पदाधिकारी निशांत किरण को निर्देश दिया गया है कि DPO अजीत अमर के खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर तत्काल प्रस्तुत करें, ताकि विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सके। जिलाधिकारी ने साफ किया है कि मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी अधिकारियों को संयुक्त रूप से जांच पूरी कर शीघ्र रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।



