Bihar: नालंदा:- कहने को तो बिहार में शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध है बावजूद बिहार में जहरीली शराब पीकर मरने वालों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, गोपालगंज का मामला बढ़िया से ठंडा भी नहीं हुआ है कि नया मामला नालंदा जिले में शराब से मौत का आया है, शनिवार यहां जहरीली शराब पीने से 7 लोगों की मौत हो गई है, जबकि अभी कुछ गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती हैं, इस घटना के बाद बिहार में सियासत भी काफी तेज हो गई है।
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जदयू की सहयोगी पार्टी बीजेपी ने ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है, जहरीली शराब पीने से 7 लोगों की हुई मौत के बाद एनडीए की प्रमुख सहयोगी जेडीयू और बीजेपी एक बार फिर आमने-सामने आ गए है, संजय जयसवाल ने शुक्रवार को अपनी फेसबुक पोस्ट में शराबबंदी कानून की समीक्षा की बात कही थी, शनिवार को घटना घटने के बाद बीजेपी एक बार फिर से अपनी ही सरकार के खिलाफ खड़ी हो गई है।
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शराबबंदी को लेकर पार्टी के प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने कहा है कि सरकार को शराबबंदी की समीक्षा दुबारा फिर से करनी चाहिए, बावजुद सरकार हाथ पर हाथ रख कर बैठी है, शराब माफिया प्रदेश में अपना अवैध कारोबार लगातार फैला रहे हैं, जिस तरह से शराबबंदी बिहार में लागू किया गया है, वह बिल्कुल ही अनुचित है, गरीब लोगों को जेल में बंद किया जा रहा है और शराब के कारोबार करने वाले लोग पुलिस की पकड़ से दूर है, शराबबंदी कानून सिर्फ कागजों पर सिमट कर रह गई है, इस कानून का वास्तविकता में कहीं कोई अस्तित्व नहीं है, इस कानून में कई तरह की त्रुटियां हैं।
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वही शराबबंदी को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का भी बड़ा बयान आया है, जीतन राम मांझी ने शराबबंदी कानून की दोबारा फिर से समीक्षा करने कि मांग की है, नालंदा में शराब पीने से 7 लोगों की हुई मौत पर दुख जताते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से एक बार फिर से शराबबंदी पर समीक्षा करना ही उचित बताया है, पूर्व सीएम ने जोर देते हुए कहा है कि नीतीश कुमार समझ नहीं पा रहे हैं, शराबबंदी को उन्होंने अपना प्रतिष्ठा बना लिया है, जब प्रधानमंत्री मोदी कृषि कानूनों को वापस ले सकते हैं तो शराबबंदी की समीक्षा क्यों नहीं हो सकती है।
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