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वही डीडीसी ज्ञान प्रकाश के द्वारा बताया गया की जिला प्रशासन की ओर से जनजातीय संस्कृति के उत्सव का आयोजन पहली बार किया जा रहा है। इसे हर साल आयोजित किया जाएगा। जनजातीय संस्कृति के उत्थान और यहां पर्यटकीय सुविधा विकसित कर इनकी आर्थिक व सामाजिक, राजनीतिक विकास किया जा सकता है। पर्यटन स्थल विकसित कर विश्व में स्वीटजरलैंड का नाम है और उसकी अर्थव्यवस्था लाजवाब है। यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। बंशीखोह, तेल्हार कुंड आदि पर्यटन स्थल को विकसित करने का कार्य शुरू हो चुका है। वही कार्यक्रम के शुरू में सर्वप्रथम जनजातीय समुदाय के रामरुप उरांव दुग्धा के नेतृत्व में 12 सदस्यीय टीम द्वारा उरांव भाषा में घटवारी गीत प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमूह का दिल जीत लिया गया। वहीं गुल्लू गांव की टीम ने उरांव भाषा में झूमर गीत का सामूहिक रुप मांदर की थाप पर प्रस्तुत कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
साथ ही जनजातीय समुदाय से आने वाले स्थानीय प्रखंड उप प्रमुख संजय उरांव के नेतृत्व में नागपुरी नृत्य की रिकार्डिंग पर युवक-युवती ने शानदार नृत्य प्रस्तुत किया। आवासीय विद्यालय देवरी के छात्रों ने भी सामूहिक रूप से करमा नृत्य गान प्रस्तुत किया। मैदानी इलाकों के कलाकारों ने भी अपने कला का प्रदर्शन किया। सर्व प्रथम ढुनमुन राजा ने चैता गाकर उपस्थित जनसमूह को झूमने पर विवश कर दिया। वहीं कैमूर जिले की उभरती हुई लोकगीत गायिका तनुश्री यादव ने भोजपुरी गीत गाए तो उपस्थित जनसमूह ने करतल ध्वनि से माहौल में उत्साह भर दिया। कार्यक्रम के अंत में जिला स्तरीय पदाधिकारी, स्थानीय पदाधिकारी व कर्मी जनजातीय कलाकारों के साथ मांदर के थाप पर थिरकते रहे और सब एक-दूसरे के हाथ पकड़ जनजातीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया।