Bihar, कैमूर (भभुआ): बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ ने अपनी 17 सूत्री लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। कैमूर जिला मुख्यालय स्थित लिच्छवी भवन में बुधवार को संघ के बैनर तले भूमि सुधार कर्मचारियों ने एकदिवसीय सामूहिक धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए मांगें पूरी करने का अल्टीमेटम दिया।
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धरने को संबोधित करते हुए कर्मचारियों ने बताया कि राज्य में कुल 11,000 स्वीकृत संविदा पदों के मुकाबले महज 3,500 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिससे अत्यधिक वर्कलोड बढ़ गया है। हालात ऐसे हैं कि एक-एक कर्मचारी को तीन-तीन पंचायतों का जिम्मा सौंप दिया गया है, जबकि नियम के अनुसार एक कर्मचारी को एक पंचायत ही दी जानी चाहिए।
धरना स्थल पर मौजूद राजस्व कर्मचारी रूबी कुमारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो 9 फरवरी को पटना में राज्यस्तरीय धरना दिया जाएगा। इसके बाद पूरे बिहार में अनिश्चितकालीन हड़ताल और लॉकडाउन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि अत्यधिक दबाव के कारण कर्मचारी मानसिक तनाव में हैं और समय पर रैयतों का काम भी नहीं हो पा रहा है।
कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले वर्ष हड़ताल के बाद जून 2025 में सरकार ने 2–3 महीने के भीतर मांगें पूरी करने का लिखित आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।
संघ के पदाधिकारी हरीश कुशवाहा ने बताया कि संघ की बैठक हो चुकी है और सरकार को दो बार लिखित सूचना भी दी जा चुकी है। इसके बावजूद अगर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो राज्यव्यापी आंदोलन अपरिहार्य होगा। वहीं अन्य कर्मचारी नेताओं ने कहा कि वर्तमान कर्मचारियों को अतिरिक्त काम का उचित भत्ता दिया जाए, अन्यथा व्यवस्था और अधिक विकराल हो जाएगी। धरने में जिले भर से बड़ी संख्या में भूमि सुधार कर्मचारी शामिल हुए और सरकार से जल्द सकारात्मक पहल की मांग की।



