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वही इस सम्बन्ध में राज्य सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता पी.के. शाही ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं और परीक्षा पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई थी। उन्होंने बताया की परीक्षा के दौरान आयोग द्वारा जारी सभी दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन किया गया था। परीक्षा केंद्रों के बाहर निजी कोचिंग संस्थानों के लोग एवं परीक्षार्थियों के परिजन मौजूद थे, जिन्हें दूर रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था। परीक्षा केंद्रों पर जैमर भी सुचारू रूप से काम कर रहे थे। महाधिवक्ता ने कोर्ट को यह भी बताया कि पटना के बापू सभागार में आयोजित परीक्षा के दौरान कुछ छात्रों ने हंगामा किया।
जिस कारण परीक्षा बाधित हुई। इस घटना के बाद अगमकुआं थाना में दो प्राथमिकी दर्ज की गईं, कुछ छात्रों को गिरफ्तार किया गया, एवं कई छात्रों पर तीन साल के लिए परीक्षा देने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। सरकार की ओर से बताया गया कि परीक्षा के विवादित प्रश्नों पर परीक्षार्थियों से आपत्तियां मांगी गई थीं। इन आपत्तियों की समीक्षा के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई गई, जिसने विचार-विमर्श के बाद निर्णय लिया, और उसी आधार पर पीटी परीक्षा का परिणाम जारी किया गया। बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) ने याचिकाकर्ताओं के आरोपों को गलत बताते हुए कोर्ट को तथ्यों से अवगत कराया। आयोग ने तर्क दिया कि परीक्षा की प्रक्रिया निष्पक्ष थी और सभी मानकों का पालन किया गया।