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सैकड़ों वर्षों पुरानी आस्था से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
मदुरना गांव में स्थित मां चंडेश्वरी का मंदिर क्षेत्र के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल है। भभुआ रोड रेलवे स्टेशन से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस धाम में चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों के बीच मंदिर की स्थापना को लेकर एक प्राचीन कथा प्रचलित है। ग्रामीणों के अनुसार, सैकड़ों वर्ष पहले मदुरना गांव के एक व्यक्ति को स्वप्न में मां ने दर्शन देकर बताया था कि उनकी प्रतिमा मसोई गांव में है। मां के आदेश के अनुसार प्रतिमा को वहां से लाकर मधुरना गांव में स्थापित किया गया। शुरुआत में प्रतिमा के लिए एक छोटे मंदिर का निर्माण कराया गया था, जहां आज भी पुरानी प्रतिमा विराजमान है। बाद में इसके समीप एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया, जिसमें मां चंडेश्वरी की दूसरी प्रतिमा स्थापित की गई।

सप्तमी पर भंडारे की परंपरा आज भी कायम
मंदिर से जुड़ी धार्मिक परंपराओं के अनुसार, पटेल समाज के लोगों द्वारा प्रत्येक वर्ष शारदीय नवरात्रि की सप्तमी तिथि पर भंडारे का आयोजन किया जाता है। इस दौरान ब्राह्मणों सहित मां के दर्शन और पूजन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया जाता है। इस वर्ष भी परंपरा का निर्वहन करते हुए भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर परिसर में पूरे दिन धार्मिक माहौल बना रहा और भक्त मां के जयकारे लगाते हुए पूजा-अर्चना में जुटे रहे।
मनोकामना पूरी होने पर निभाई जाती है विशेष परंपरा
मंदिर के पुजारी राजेंद्र उपाध्याय, पूर्व मुखिया प्रभु नारायण सिंह, भानु प्रताप सिंह, देवदत्त सिंह, पुतुल सिंह, घल्लू सिंह, राधेश्याम सिंह और अशोक उपाध्याय सहित अन्य लोगों ने बताया कि मां चंडेश्वरी के प्रति मदुरना सहित आसपास के सैकड़ों गांवों के लोगों की गहरी आस्था है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, सच्चे मन से मां की आराधना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मान्यता के मुताबिक, जिन श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है, उनमें से कुछ लोग चैत्र नवरात्रि के दौरान बकरे की रक्तविहीन बलि की परंपरा निभाते हैं। श्रद्धालु इसे मां की शक्ति और महिमा से जुड़ी विशेष धार्मिक परंपरा मानते हैं। इस प्रकार मां चंडेश्वरी धाम में नवरात्रि के अवसर पर उमड़ने वाली भीड़ और वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपराएं क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत तथा लोगों की अटूट आस्था को दर्शाती हैं।



