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मां चंडेश्वरी धाम के मुख्य पुजारी राजेंद्र उपाध्याय ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार चंड और मुंड का संहार करने के बाद मां दुर्गा यहां चंडेश्वरी रूप में विराजमान हुई थीं। इसी कारण यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है। उन्होंने कहा कि हर साल चैत्र नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचकर माता के दर्शन करते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं।
उन्होंने आगे बताया कि सप्तमी से नवमी तक जिन भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, वे मां के चरणों में बकरे की रक्त-विहीन बलि चढ़ाते हैं।

मान्यता के अनुसार जब अभिमंत्रित अक्षत बकरे पर डाला जाता है, तो वह फिर से उठ खड़ा होता है, जिसे श्रद्धालु मां की विशेष कृपा और चमत्कार के रूप में देखते हैं। इस अद्भुत परंपरा को देखने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। मेले के दौरान विभिन्न प्रकार के व्यंजन, खिलौने और श्रृंगार सामग्री की दुकानों के स्टॉल लगाए गए थे। मंदिर में पूजा करने आए श्रद्धालुओं ने मेले का भी आनंद लिया और जमकर खरीदारी की। पूरे दिन मेले में रौनक बनी रही और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही।



