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बैंकों की सुस्ती पर उप विकास आयुक्त सख्त, लक्ष्य पूरा न करने वाले शाखा प्रबंधकों से मांगा स्पष्टीकरण

कैमूर में बैंकों की सुस्ती पर DDC सख्त, लक्ष्य पूरा न करने वाले शाखा प्रबंधकों से मांगा स्पष्टीकरण

Bihar | कैमूर (भभुआ): जिले में संचालित स्वरोजगार योजनाओं की धीमी प्रगति को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। उप विकास आयुक्त (DDC) की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में PMEGP, PMFME एवं प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में कई बैंक शाखा प्रबंधकों के बिना सूचना अनुपस्थित रहने पर उप विकास आयुक्त ने गहरी नाराजगी जताते हुए इसे सरकारी कार्यों में गंभीर लापरवाही बताया।

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बैंकों की सुस्ती पर नाराजगी

बैठक के दौरान पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के जिला अग्रणी प्रबंधक सहित बिहार ग्रामीण बैंक की अधौरा, देवहलीया, कर्मनाशा, लहूरीबारी, पानापुर, रुपपुर, चांद, आदर्श नुआंव, नटया और फकरावाद शाखा के प्रबंधक अनुपस्थित पाए गए। इसके अलावा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की भभुआ एवं मोहनियां शाखा के प्रबंधक भी बैठक में शामिल नहीं हुए। उप विकास आयुक्त ने इसे गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के संकेत दिए।

योजनावार बैंकों का प्रदर्शन रहा निराशाजनक

PMEGP योजना: बिहार ग्रामीण बैंक को 5 मामलों का लक्ष्य दिया गया था, जिसके विरुद्ध अब तक 4 आवेदनों को स्वीकृति दी गई है। क्षेत्रीय प्रबंधक ने शेष लक्ष्य को एक सप्ताह के भीतर पूरा कर भुगतान सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।

PMFME योजना: इस योजना के तहत बैंकों का प्रदर्शन अत्यंत निराशाजनक पाया गया। 32 मामलों के लक्ष्य के मुकाबले केवल 6 आवेदनों को स्वीकृति मिली, जबकि मात्र 1 आवेदन का ही भुगतान किया गया। इस पर उप विकास आयुक्त ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की और तत्काल सुधार के निर्देश दिए।

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना: लंबित आवेदनों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निष्पादित करने तथा समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश बैंकों को दिया गया।

“बिना ठोस कारण आवेदन रद्द न करें” — DDC की सख्त हिदायत

उप विकास आयुक्त ने जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक को निर्देश दिया कि बैंकों द्वारा रद्द किए गए सभी आवेदनों की सूक्ष्म जांच की जाए। साथ ही बैंकों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा गया कि—

“किसी भी आवेदन को अनावश्यक रूप से रद्द कर आवेदकों को परेशान न किया जाए। यदि आवेदन रद्द किया जाता है, तो उसके पीछे ठोस और वैध तकनीकी कारण होना अनिवार्य है।”

बैठक में जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक, बिहार ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक, उद्योग विस्तार पदाधिकारी, संबंधित बैंकों के शाखा प्रबंधक, डीआरपी (DRP) सहित कई आवेदक मौजूद रहे।

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