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विश्व हिंदू परिषद के बिहार-झारखंड धर्म प्रसार प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि कई परिवारों ने समय के साथ महसूस किया कि उनसे गलत तरीके से धर्म परिवर्तन कराया गया था, जिसके बाद उन्होंने स्वेच्छा से अपने मूल धर्म में लौटने का निर्णय लिया। घर वापसी करने वालों में बायसी थाना क्षेत्र के हरिहरनटोड़ गांव के सुरेंद्र राय, मीना देवी और कालू हरिजन समेत कई लोगों ने अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि पादरियों द्वारा प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया गया था, लेकिन बाद में उन्हें अपनी परंपराओं, देवी-देवताओं की पूजा और सांस्कृतिक मूल्यों से दूर किए जाने पर असहजता महसूस हुई।
इसके बाद उन्होंने स्थानीय स्तर पर शिकायत की और सामाजिक संगठनों से संपर्क किया। आयोजकों का कहना है कि सीमांचल क्षेत्र सहित कई इलाकों में गरीबी और अशिक्षा का फायदा उठाकर धर्म परिवर्तन के प्रयास किए जाते रहे हैं, जिस पर पहले भी विवाद और कानूनी मामले सामने आए हैं। संविधान के तहत लोभ या धमकी देकर धर्म परिवर्तन कराना अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे में क्रिसमस के दिन हुई यह घर वापसी समाज के लिए एक संदेश मानी जा रही है कि धर्म का चयन स्वेच्छा और विश्वास से होना चाहिए, न कि किसी दबाव या प्रलोभन से।



