Bihar | कैमूर | चैनपुर: कैमूर जिले के चैनपुर प्रखंड में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्त शिक्षिका को पहले बर्खास्त किया गया, लेकिन बाद में कथित मिलीभगत से पुनः बहाल कर दिया गया। इतना ही नहीं, बर्खास्तगी अवधि का एरियर (बकाया वेतन) भी भुगतान कर दिया गया। मामले के उजागर होने के बाद जिला एवं प्रखंड शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
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क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार बढ़ौना पंचायत अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय गुलड़िया में कार्यरत शिक्षिका निर्मला देवी का नियोजन वर्ष 2005 में पंचायत शिक्षक के रूप में हुआ था। वर्ष 2015 में न्यायालय के निर्देश पर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा शिक्षकों के शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच कराई गई।
जांच के दौरान बिहार बोर्ड द्वारा निर्मला देवी का इंटरमीडिएट प्रमाण पत्र फर्जी करार दिया गया। इसके आधार पर निगरानी विभाग ने चैनपुर थाना कांड संख्या 154/2019 दर्ज कराई और नियोजन इकाई द्वारा शिक्षिका को बर्खास्त कर दिया गया।
अदालत में बदला गया प्रमाण पत्र का आधार
आवेदक द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, बर्खास्तगी के बाद सिविल कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह दलील दी गई कि संबंधित शिक्षिका का प्रमाण पत्र बिहार बोर्ड का नहीं बल्कि हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयागराज (इलाहाबाद) का है।
बताया गया है कि सुनवाई के दौरान न तो निगरानी विभाग को पक्षकार बनाया गया और न ही शिक्षा विभाग ने प्रभावी रूप से अपना पक्ष रखा। परिणामस्वरूप न्यायालय से शिक्षिका को बेल मिल गई।
पुनः नियुक्ति और एरियर भुगतान का आरोप
आरोप है कि जिला अपीलीय प्राधिकार कैमूर में परिवाद दायर कर कथित शिक्षक रामपुकार एवं जिला अपीलीय प्राधिकार में तत्कालीन कार्यरत हरेराम गुप्ता जो वर्तमान लिपिक जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय कैमूर में कार्यरत है के मिलीभगत से पुनः नियुक्ति का आदेश पारित कराया गया। जबकि मानव संसाधन विकास विभाग, बिहार के ज्ञापन संख्या 3152 दिनांक 25 अगस्त 2008 के अनुसार हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद से निर्गत प्रमाण पत्र अमान्य घोषित किया जा चुका है।
इसके बावजूद: वर्ष 2023 में पुनः नियोजन कर दिया गया, बिना शैक्षणिक दस्तावेज के जांच किए एरियर का भुगतान किया गया, वेतन पोर्टल एवं ई-शिक्षा कोष में नाम पुनः दर्ज कराया गया, आवेदन में दलालों और विभागीय कर्मियों पर लाखों रुपये की अवैध उगाही के आरोप भी लगाए गए हैं।
अधिवक्ता ने मांगी उच्चस्तरीय जांच
व्यवहार न्यायालय मोहनिया के अधिवक्ता रंजय तिवारी जोकि आवेदक है के द्वारा 5 जनवरी 2026 को महानिदेशक निगरानी अन्वेषण ब्यूरो पटना एवं अपर सचिव शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की गई।
पत्र में डीपीओ स्थापना, प्रखंड स्तरीय नियोजन इकाई तथा कुछ कर्मियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है।
विभाग ने मांगे अभिलेख
उप निदेशक प्राथमिक शिक्षा पटना के कार्यालय से कैमूर जिला शिक्षा पदाधिकारी को जांच का निर्देश भेजा गया है।
इसके बाद जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) द्वारा प्रखंड विकास पदाधिकारी सह सचिव, प्रखंड शिक्षा नियोजन इकाई चैनपुर से पुनर्नियुक्ति से संबंधित सभी अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा गया है।
इस मामले में प्रखंड विकास पदाधिकारी शुभम प्रकाश ने बताया कि मामला उनके कार्यकाल का नहीं है, लेकिन जिला स्तर से प्राप्त निर्देश के अनुसार संबंधित दस्तावेज भेजे जा रहे हैं।
मुख्य सवाल
यदि प्रमाण पत्र फर्जी था तो पुनः नियुक्ति कैसे हुई?
अमान्य घोषित संस्था के प्रमाण पत्र पर बहाली किस आधार पर की गई?
बर्खास्तगी अवधि का भुगतान बिना शैक्षणिक दस्तावेज जांच किए किस नियम के तहत हुआ?
सुनवाई के दौरान विभाग ने प्रभावी पैरवी क्यों नहीं की?
फिलहाल स्थिति
मामले में विभागीय स्तर पर जांच प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह शिक्षा विभाग के लिए बड़ा प्रशासनिक घोटाला साबित हो सकता है।



