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फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे 18 साल से कर रहे थे नौकरी, पंचायत शिक्षक पर निगरानी का शिकंजा

कैमूर में फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी कर रहे शिक्षक पर केस दर्ज, निगरानी विभाग की कार्रवाई

कैमूर (चैनपुर): जिले के चैनपुर प्रखंड में फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र के आधार पर शिक्षक की नौकरी करने का मामला सामने आया है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में खुलासा होने के बाद संबंधित शिक्षक के खिलाफ चैनपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।

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जानकारी के अनुसार चैनपुर प्रखंड क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय डीह गुलडिया में कार्यरत पंचायत शिक्षक सत्येंद्र नाथ के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है। निगरानी विभाग के पुलिस निरीक्षक सह सहायक जांचकर्ता जहांगीर अंसारी द्वारा चैनपुर थाने में आवेदन देकर मामला दर्ज कराया गया है।
आवेदन में बताया गया है कि माननीय पटना उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका (सीडब्ल्यूजेसी संख्या 15459/14) में पारित आदेश के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण प्रमाण पत्रों की जांच की जा रही थी। इसी क्रम में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) कैमूर और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी चैनपुर द्वारा उपलब्ध कराए गए अभिलेखों की जांच की गई।

जांच के दौरान यह सामने आया कि सत्येंद्र नाथ, पिता राजू प्रसाद, ग्राम कोइंदी थाना चैनपुर का नियोजन वर्ष 2007 में पंचायत शिक्षक के रूप में हुआ था और वर्तमान में वे प्राथमिक विद्यालय डीह गुलडिया में कार्यरत हैं।
शिक्षक द्वारा अपने शैक्षणिक प्रमाण पत्र के रूप में उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद, संस्कृत भवन से जारी अंक पत्र प्रस्तुत किया गया था। जब निगरानी विभाग ने इस प्रमाण पत्र की सत्यता की जांच कराई तो परिषद की ओर से स्पष्ट किया गया कि अनुक्रमांक 466302 से वर्ष 2005 की उत्तर मध्यमा द्वितीय परीक्षा में सत्येंद्र नाथ नाम का कोई अभ्यर्थी शामिल ही नहीं हुआ था।

इस प्रकार जांच में उनका शैक्षणिक अंक पत्र फर्जी पाया गया। आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि शिक्षक ने अज्ञात व्यक्तियों के साथ मिलकर कूटरचना कर फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराया और उसे असली बताकर धोखाधड़ी करते हुए नौकरी हासिल कर ली।
इस संबंध में चैनपुर थानाध्यक्ष विजय प्रसाद ने बताया कि निगरानी विभाग के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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