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वही पटेल के द्वारा पिछले साल फरवरी में साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। जिसमे उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई शिकायत नहीं की थी। जिसके बाद साइबर डीएसपी के निर्देश पर जांच शुरू हुई। जांच में पता चला कि आरोपी कुमार प्रशांत वारिसलीगंज प्रखंड के ठेरा गांव का रहने वाला है और नवादा शहर के राजेंद्र नगर में भी उसका घर है। पुलिस ने एक साल की जांच के बाद यह प्राथमिकी दर्ज की है। मामले का खुलासा तब हुआ जब जिला मंत्री को डाक अधीक्षक के पति से इसकी जानकारी मिली। इसके बाद की गई जांच में कुमार प्रशांत का नाम सामने आया।
इस सम्बन्ध में जब पुलिस ने सांसद के निजी प्रतिनिधि से बात की तो पता चला कि लेटर पैड और हस्ताक्षर जाली है। जांच में यह भी पता चला कि ईमेल आईडी को बाद में डिलीट कर दिया गया है। पुलिस ने जांच के क्रम में भारतीय मजदूर संघ के अन्य नेताओं से भी बयान लिया। जिसमें कई लोगों ने पुलिस को बताया कि सुधीर कुमार पटेल ने जब इस मामले को लेकर डाक सहायक कुमार प्रशांत से बातचीत की तो वह संघ के जिला मंत्री सुधीर कुमार पटेल से उलझ पड़ा था और झूठे मुकदमे में फंसा देने की धमकी भी दी थी।