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वही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि जातिगत जनगणना सर्वसम्मति से कराई जा रही है, हम लोगों ने केंद्र से इसकी अनुमति ली है, हम पहले चाहते थे कि पूरे देश में जाति आधारित जनगणना हो, लेकिन जब केंद्र सरकार नहीं मानी तो हम लोगों ने जाति आधारित गणना सह आर्थिक सर्वे कराने का फैसला लिया।
तेजस्वी यादव ने कहा कि कोर्ट के आदेश को पहले समझेंगे फिर मुख्यमंत्री जी से बैठकर बात करेंगे और तय करेंगे आगे क्या करना है, डिप्टी सीएम ने कहा कि केंद्र हमारे साथ सौतेला व्यवहार करती है हम अपने पिछड़े लोगों को आगे लाने के लिए कुछ करना चाहते हैं तो बीजेपी वाले सवाल उठाते हैं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा है कि नीतीश कुमार नहीं चाहते कि जातीय गणना हो, नीतीश कुमार की गलतियों की वजह से हाईकोर्ट ने रोक लगाई है।
जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा है कि यह हाईकोर्ट का अंतरिम फैसला है, इसे फाइनल नहीं माना जाना चाहिए, वही राजद के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा है कि सरकार फैसले का अध्ययन करेगी और आगे कौन सा कदम उठाया जाए इस पर विचार होगा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह का कहना है कि सोच-विचार कर बिहार सरकार ने जाति आधारित गणना का फैसला लिया था दूसरे प्रदेशों में भी जाति आधारित गणना हुई है इस पर इतनी हाय-तौबा क्यों? उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि जातीय गणना पर लगी रोक नीतीश कुमार की लापरवाही का नतीजा है। समतावादी विकास की धारा को आगे बढ़ाने में नीतीश की विफलता अब सार्वजनिक हो गई है।