बिहार, चैनपुर (कैमूर): प्रखंड मुख्यालय स्थित बीआरसी भवन में सोमवार को एक विशेष वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें प्रखंड के सभी प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के बीच वाद्य यंत्रों एवं ऑडियो उपकरणों का वितरण किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में बच्चों के लिए आनंददायक, रुचिकर एवं आकर्षक शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है, ताकि छात्र-छात्राओं की विद्यालय के प्रति रुचि बढ़े और उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हो सके।
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वितरण कार्यक्रम के दौरान प्रधानाध्यापकों को ढोलक, झाल, बांसुरी, कैसियो माइक एवं साउंड बॉक्स जैसी सामग्रियां क्रमवार प्रदान की गईं। सभी प्रधानाध्यापकों ने विभाग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए इन उपकरणों को प्राप्त किया।
बीईओ ने दिए स्पष्ट निर्देश
कार्यक्रम में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी धीरेंद्र प्रसाद स्वयं उपस्थित रहे। उन्होंने प्रधानाध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए इन सभी वाद्य यंत्रों एवं उपकरणों का विद्यालयों में नियमित और सार्थक उपयोग किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विभाग की नजर रहेगी।
उन्होंने बताया कि विद्यालय निरीक्षण एवं जांच के दौरान इन उपकरणों के उपयोग को लेकर प्रधानाध्यापकों से जानकारी ली जाएगी और यह देखा जाएगा कि सामग्री का सही तरीके से इस्तेमाल हो रहा है या नहीं।
संगीत व गतिविधियों से बढ़ेगा बच्चों का जुड़ाव
बीईओ धीरेंद्र प्रसाद ने कहा कि संगीत, गतिविधि आधारित शिक्षण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों से बच्चे विद्यालय के प्रति अधिक आकर्षित होते हैं। वाद्य यंत्रों के प्रयोग से प्रार्थना सभा, बाल सभा, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं अन्य शैक्षणिक गतिविधियां अधिक जीवंत और प्रभावशाली बनेंगी, जिससे बच्चों का विद्यालय में ठहराव बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि इस पहल से न केवल छात्रों की उपस्थिति में सुधार होगा, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास को भी मजबूती मिलेगी।
सामग्री की सुरक्षा और नियमित उपयोग पर जोर
प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने सभी प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया कि वे इन सामग्रियों को सुरक्षित रखें और बच्चों के साथ नियमित रूप से प्रयोग में लाएं। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में सकारात्मक, आनंददायक और प्रेरणादायक माहौल बनाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के अंत में प्रधानाध्यापकों ने शिक्षा विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए इसे बच्चों के हित में एक सराहनीय और दूरदर्शी कदम बताया।



