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गैंगरेप केस में ऐतिहासिक फैसला: तीनों दोषियों को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास, पीड़िता को 6 लाख मुआवजा

गैंगरेप केस में बड़ा फैसला: तीन दोषियों को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास

Bihar: जमुई, नाबालिग के साथ अपहरण और लंबे समय तक दुष्कर्म के मामले में पोक्सो कोर्ट ने कड़ा फैसला सुनाते हुए कटिहार के तीन दोषियों को अंतिम सांस तक कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने प्रत्येक आरोपी पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है और पीड़िता को 6 लाख रुपये प्रतिकर मुआवजा देने का आदेश दिया है। जुर्माना नहीं देने की स्थिति में अतिरिक्त सजा भी भुगतनी होगी। यह फैसला पोक्सो के विशेष न्यायाधीश महेश्वर दुबे की अदालत ने सुनाया, जिसमें दोनों पक्षों की दलीलें, गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया गया।

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इस मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी कटिहार जिले के रहने वाले मु. इमरान उर्फ चांद, मु. आफताब अंसारी और मु. सद्दाम हैं। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक मनोज कुमार शर्मा ने इस मामले को बेहद घृणित बताते हुए मृत्युदंड की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ताओं ने अपनी दलीलें पेश कीं। मामले की शुरुआत 1 दिसंबर 2025 को हुई थी, जब जमुई जिले के अलीगंज बाजार से 15 वर्षीय नाबालिग लड़की अचानक लापता हो गई। कई दिनों तक तलाश के बाद 24 दिसंबर 2025 को जमुई पुलिस ने कटिहार के एक बंद कमरे से उसे बरामद किया। पुलिस और कोर्ट में दिए गए अपने बयान में पीड़िता ने बताया कि उसे अलीगंज से अपहरण कर कटिहार ले जाया गया, जहां उसे बेहोशी की हालत में रखा गया और लगातार कई दिनों तक उसके साथ दुष्कर्म किया गया। पीड़िता के अनुसार, आरोपियों ने उसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाकर प्रताड़ित किया और लंबे समय तक बंद कमरे में रखा। विरोध करने पर मारपीट की जाती थी और मानसिक व शारीरिक यातनाएं दी जाती थीं।

करीब 23 दिनों तक उसे बंधक बनाकर रखा गया, जिसके बाद एक फोन कॉल के आधार पर पुलिस को अहम सुराग मिला और उसे सुरक्षित बरामद कर लिया गया। दरअसल, पीड़िता की मां अपनी बेटी की तलाश में लगातार परेशान थी। इसी दौरान एक फोन कॉल आया, जिसमें बताया गया कि लड़की कटिहार में है। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए छापेमारी की और नाबालिग को बरामद कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने इस मामले के स्पीडी ट्रायल की मांग की थी। इसके बाद पोक्सो कोर्ट ने तेजी से सुनवाई शुरू की। 17 जनवरी 2026 को पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया और 22 जनवरी को अदालत ने मामले का संज्ञान लिया। इसके बाद पीड़िता, उसकी मां, डॉक्टर, पुलिस अधिकारी और स्कूल के प्रधानाध्यापक समेत कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

फरवरी के अंत तक दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने 16 मार्च को तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया और 24 मार्च 2026 को सजा सुनाई। इस पूरे मामले में अदालत ने नए आपराधिक कानून बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की संबंधित धाराओं के तहत सजा सुनाई, जिनमें कठोर आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक का प्रावधान है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषियों को अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा दी। यह फैसला सामने आने के बाद लोगों में चर्चा है कि गंभीर अपराधों के मामलों में तेज सुनवाई और कड़ी सजा से अपराधियों के खिलाफ कड़ा संदेश गया है। वहीं पुलिस प्रशासन का कहना है कि इस तरह के मामलों में आगे भी सख्ती से कार्रवाई की जाएगी और बच्चों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जाएगी।

 

 

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