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बैठक में किसानों ने आरोप लगाया कि जिन भूमि धारकों के नाम से जमाबंदी दर्ज है, उनके वंशजों द्वारा किए गए आवेदन भी बिना सुधार का अवसर दिए निरस्त कर दिए गए। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर एक सप्ताह के भीतर निरस्त आवेदनों को संशोधित करने के लिए सुधार हेतु व्यवस्था खोलने की मांग की गई। किसानों का कहना था कि वे सभी वास्तविक भूमि धारक हैं और उनकी धान सहित अन्य फसलें बाढ़ व असमय वर्षा से बर्बाद हुई हैं। ऐसे में उन्हें क्षतिपूर्ति राशि से वंचित करना अन्यायपूर्ण है। जिलाध्यक्ष अभिमन्यु सिंह ने कहा कि बिना सुधार का अवसर दिए आवेदनों को निरस्त करना उचित नहीं है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि शीघ्र सुधार की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि यदि 1536 किसानों को क्षतिपूर्ति राशि नहीं दी गई तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा। बैठक को संबोधित करते हुए किसान नेता अर्जुन सिंह कुशवाहा ने कहा कि प्रखंड में बाढ़ और बे मौसम बारिश से बड़ी मात्रा में धान की फसल नष्ट हुई थी। किसानों को आवेदन के लिए बहुत कम समय मिला, जिसके कारण जल्दबाजी में त्रुटियां हो गईं। उन्होंने सुधार का अवसर देने और क्षतिपूर्ति वितरण में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की। बैठक के बाद किसानों ने प्रखंड विकास पदाधिकारी और प्रखंड कृषि पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निरस्त आवेदनों में सुधार का अवसर देने तथा क्षतिपूर्ति वितरण प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की। सभा में सैकड़ों किसान उपस्थित रहे।



