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उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि महुअर के लिए स्वीकृत जिम को भभुआ के सर्किट हाउस में स्थापित कर दिया गया, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। उनके अनुसार, इसे जगजीवन स्टेडियम में लगाया जाना चाहिए था ताकि खिलाड़ियों को सीधा फायदा मिलता। अजीत सिंह ने स्कूलों में खेल सामग्री खरीद को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उच्च विद्यालयों को 25 हजार और मध्य विद्यालयों को 10 हजार रुपये दिए गए, लेकिन जिला शिक्षा कार्यालय द्वारा एक तय ठेकेदार से ही सामग्री खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है। साथ ही उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) भी उसी एजेंसी से दिलाने की बात कही जा रही है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने जिले के कई प्रखंडों में बने मिनी स्टेडियम और खेल मैदानों की स्थिति को भी चिंताजनक बताया।
उनके मुताबिक, गुड़िया, बगड़ी समेत कई जगहों पर मैदानों का निर्माण मानकों के अनुरूप नहीं हुआ है और कई स्थानों पर स्थिति इतनी खराब है कि वहां खेल गतिविधियां संभव ही नहीं हैं। इसके अलावा दुर्गावती में प्रस्तावित मिनी स्टेडियम का निर्माण अब तक शुरू नहीं होने और कई जगहों पर अधूरे काम का भी मुद्दा उठाया गया। अजीत सिंह ने कहा कि कई खेल मैदान अतिक्रमण की चपेट में हैं, जिन्हें तत्काल मुक्त कराकर विकसित करने की जरूरत है। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने मांग की कि सभी निर्माण कार्यों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी ठेकेदारों व अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने जिले में खेल सुविधाओं को मानकों के अनुरूप विकसित करने और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया। इस मौके पर पूर्व मंत्री बृजकिशोर बिंद, जिला राजद अध्यक्ष अकलूराम समेत कई पार्टी कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे।



