Bihar: कैमूर जिले के चैनपुर प्रखंड के बराढ़ी गांव के रहने वाले किसान परिवार के बेटे ने अपनी मेहनत और लगन से बड़ी सफलता हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। बराढ़ी गांव निवासी किसान अरुण मेहरोत्रा के पुत्र अमन मेहरोत्रा ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में 571वां रैंक प्राप्त कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।
अमन ने यह सफलता अपने दूसरे प्रयास में प्राप्त की है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ पूरे गांव और जिले में खुशी का माहौल है।
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गांव में जश्न, लोगों ने दी बधाई
जैसे ही अमन की सफलता की खबर गांव पहुंची, लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। उनके पिता अरुण मेहरोत्रा और चाचा डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने ग्रामीणों और शुभचिंतकों के बीच मिठाई बांटकर खुशी जाहिर की। गांव के लोगों ने भी अमन को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
साधारण किसान परिवार से निकलकर पाई बड़ी सफलता
बताया जाता है कि अमन एक साधारण किसान परिवार से आते हैं। उनके पिता खेती-बाड़ी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने बेटे की पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी और बेहतर शिक्षा के लिए उसे दिल्ली भेजा।
अमन ने भी अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की और यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल कर ली।
शुरुआत से ही रहे मेधावी छात्र
अमन के चाचा डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि वह बचपन से ही पढ़ाई में काफी मेधावी रहे हैं। उन्होंने भभुआ से मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी से पास की थी, जिसके लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया था।
इसके बाद उन्होंने वाराणसी स्थित सेंट्रल हिंदू स्कूल से वर्ष 2018 में इंटरमीडिएट की परीक्षा दी, जिसमें उन्होंने पूरे पूर्वांचल क्षेत्र में टॉप किया था। इस उपलब्धि के लिए भी उन्हें सम्मानित किया गया था।
पहले प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंचे
यूपीएससी की तैयारी के दौरान अमन ने पहले प्रयास में भी शानदार प्रदर्शन किया था और इंटरव्यू तक पहुंचे थे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो पाया था। इसके बाद उन्होंने हार नहीं मानी और और अधिक मेहनत के साथ तैयारी जारी रखी।
आखिरकार दूसरे प्रयास में उन्होंने 571वां रैंक प्राप्त कर सफलता हासिल कर ली।
युवाओं के लिए बने प्रेरणा
अमन मेहरोत्रा की सफलता से न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा चैनपुर प्रखंड और कैमूर जिला गौरवान्वित महसूस कर रहा है। उनकी उपलब्धि क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है कि सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत और लगन से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।



