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गिरिराज सिंह ने मनरेगा योजना का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस शासनकाल में इस योजना के नाम पर सिर्फ आंकड़ों की राजनीति की गई। उस समय करीब 2.1 लाख करोड़ रुपये की योजनाएं चलाई गईं, लेकिन इसका वास्तविक लाभ गांवों तक सीमित रूप से ही पहुंच पाया। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने मनरेगा के तहत अब तक लगभग 8.50 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों, तालाबों, जल संरक्षण और अन्य बुनियादी ढांचे में बड़ा सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कार्यकाल में मनरेगा मजदूरों को केवल 100 दिन का रोजगार मिलता था, जबकि मोदी सरकार ने इसे बढ़ाकर सवा सौ दिन कर दिया है। इससे गरीब और जरूरतमंद मजदूरों को अतिरिक्त रोजगार के अवसर मिले हैं।
इसके साथ ही किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 60 दिनों तक मनरेगा कार्यों को बंद रखने का फैसला भी किया, ताकि खेती के मौसम में किसानों को मजदूरों की कमी न हो। केंद्रीय मंत्री ने महात्मा गांधी के नाम को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष अक्सर आरोप लगाता है कि भाजपा महात्मा गांधी से नफरत करती है, जबकि सच्चाई यह है कि महात्मा गांधी के नाम पर चलने वाली मनरेगा योजना को मजबूत करना और उसके तहत रोजगार के दिन बढ़ाना ही उनके प्रति सच्चा सम्मान है। अंत में गिरिराज सिंह ने कहा कि जो लोग आज मोदी सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें पहले अपने कार्यकाल की ओर देखना चाहिए। तुलना करने पर साफ हो जाएगा कि किस सरकार ने वास्तव में मजदूरों और ग्रामीण भारत के हित में काम किया है।



