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25 जुलाई को जयपुर भदवलिया गांव निवासी दुखी जायसवाल के दो पुत्र—कमलेश (11) और पवन (13)—विद्यालय से लौटने के बाद घर के पास दुर्गावती नदी में स्नान करने गए थे। इसी दौरान पवन गहरे पानी में डूबने लगा। बड़े भाई की जान बचाने के लिए कमलेश ने बिना किसी भय के नदी में छलांग लगा दी। कमलेश की तत्परता से पवन तो सुरक्षित बाहर आ गया, लेकिन दुर्भाग्यवश कमलेश स्वयं गहरे पानी में डूब गया। घटना की सूचना मिलते ही स्वजन और ग्रामीण नदी किनारे पहुंचे। मौके पर मोहनियां थाना पुलिस और अंचलाधिकारी पहुंचे, पर तत्काल सफलता नहीं मिली। बाद में एसडीआरएफ टीम को बुलाया गया और अगले दिन कमलेश का शव नदी से बरामद किया गया। इस हृदयविदारक घटना से गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
कमलेश के पिता दुखी जायसवाल और माता रीना देवी के लिए यह अपूरणीय क्षति है। परिवार को छोटे बेटे से बड़ी उम्मीदें थीं। वह पढ़ाई में मेधावी और स्वभाव से साहसी था। हालांकि उसकी शहादत ने उसे अमर बना दिया। भारत सरकार ने उसके असाधारण साहस को सम्मानित करते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 के लिए चयन किया। सम्मान प्राप्त करते समय पिता की आंखें भर आईं। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार उनके जाबांज पुत्र की स्मृतियों को समर्पित है। कमलेश की वीरता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनकर सदैव जीवित रहेगी।



