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परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर डॉ. अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मरीज की हालत बिगड़ने के बावजूद समय पर रेफर नहीं किया गया। मृतक के परिजन अक्षय मौर्य ने बताया कि अगर समय रहते वाराणसी के लिए रेफर कर दिया जाता, तो संभवतः उनकी जान बच सकती थी। घटना से नाराज परिजनों ने शव को NH-19 पर रखकर जाम लगा दिया। सूचना मिलते ही मौके पर मोहनिया की एसडीएम रत्ना प्रियदर्शिनी और डीएसपी प्रदीप कुमार पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों को समझा-बुझाकर जाम हटवाया और स्थिति को नियंत्रित किया। परिजनों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह भी जांच होनी चाहिए कि अस्पताल में इलाज करने वाले डॉक्टर के पास वैध डिग्री है या नहीं। बताया जाता है कि इस अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज भी किया जाता है।
घटना के बाद दुर्गावती पुलिस ने शव का पंचनामा कर परिजनों को सौंप दिया। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।
हालांकि, खबर लिखे जाने तक परिजनों ने थाने में कोई लिखित शिकायत नहीं दी है और न ही पोस्टमार्टम के लिए सहमति जताई है।
एसडीएम रत्ना प्रियदर्शिनी ने बताया कि परिजनों द्वारा डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया गया है। यदि अस्पताल में नामित डॉक्टर स्वयं इलाज नहीं कर रहे हैं, तो यह गंभीर मामला है और इसकी जांच की जाएगी। करीब कुछ घंटे के जाम के बाद प्रशासन के हस्तक्षेप से हाईवे को फिर से चालू करा दिया गया और स्थिति सामान्य हो गई।



