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दरसल यह घटना गुरुवार की रात करीब 10:30 बजे की है। वरीय अधिकारियों के निर्देश पर आरपीएफ पोस्ट गया के निरीक्षक प्रभारी बनारसी यादव तथा अपराध आसूचना शाखा के निरीक्षक चंदन कुमार के नेतृत्व में स्टेशन परिसर में संयुक्त गश्त की जा रही थी। इसी दौरान प्लेटफार्म संख्या 03 पर खड़ी ट्रेन संख्या 13010 दून एक्सप्रेस के स्लीपर कोच एस-3 की जांच की गई। जांच के दौरान कोच में रखे पांच पिठू बैग और एक झोला संदिग्ध हालत में मिले। जब आरपीएफ टीम ने बैगों को खोला तो उनमें बड़ी संख्या में जीवित कछुए पाए गए। आसपास मौजूद यात्रियों से पूछताछ की गई, लेकिन किसी भी यात्री ने इन बैगों पर अपना दावा नहीं किया। इसके बाद सभी बैगों को जब्त कर कछुओं को सुरक्षित रूप से आरपीएफ पोस्ट गया लाया गया।
आरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि कछुए वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अंतर्गत संरक्षित प्रजाति हैं और उनका अवैध व्यापार दंडनीय अपराध है। प्रारंभिक जांच में यह मामला अंतरराज्यीय वन्यजीव तस्करी से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। मामले की सूचना तत्काल गया वन विभाग को दी गई। सूचना मिलने पर वन विभाग की रेंज अधिकारी आरती कुमारी आरपीएफ पोस्ट पहुंचीं। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी 102 कछुओं को संरक्षण एवं आगे की कार्रवाई के लिए वन विभाग को सौंप दिया गया। इस संयुक्त कार्रवाई में आरपीएफ के कई अधिकारी और जवानों की अहम भूमिका रही। आरपीएफ ने कहा कि भविष्य में भी ऐसे अभियानों को और तेज किया जाएगा।



